अभी और जीना है
कुछ ख्वाब टूटे हुए कुछ अपने छूटे हुए टूटे को सहेजना है छूटे को टेरना हैकुछ खुशबुए बिखरी हुईकुछ लटें उलझी हुई खुशबूं को समेटना है लटों को सवारना हैकुछ जख्म रिसते हुए कुछ अश्क छलके हुए जख्मों को सीना है अश्कों को पीना है सब संवर जाएगा मेरा रूप निखार जाएगा...
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Sonal Rastogi
रिश्ते
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[02 Apr 2010 01:55 AM]



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