सिर्फ एक प्रेम कथा
*** *** ***गीली मिट्टी ,गेहूँ की बाली, तुम और मैं.... तुम्हें याद है गर्मी की दोपहरी खेलते रहे ताश, पीते रहे नींबू पानी, सिगरेट के उठते धूँए के पार उडाते रहे दिन खर्चते रहे पल और फिर किया हिसाब गिना उँगलियों पर और हँस पडे बेफिक्री...
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Pratyaksha
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[02 Apr 2010 00:57 AM]



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