ईर्ष्या जैसी व्याधि की कोई दवा नहीं

अमृत संदेश-पत्रिका य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[02 Apr 2010 00:17 AM]

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