रंजिश ही सही..(नए शेरों के साथ)

naturica मुआफी ...माज़रत ... जनाब अहमद 'फ़राज़' साहब...और जनाब 'मेहदी हसन साहब' नए शेरों के साथ सुनाइएगा ज़रूर ... आपकी सेहत और लम्बी उम्र की दुआ के साथ...!रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ । आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ॥कुछ सर्प मेरे ग़म के हो बैठे हैं... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Tiruwa

ग़ज़ल

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[02 Apr 2010 00:50 AM]

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