आवारा है वो

वीर की कलम से उथले समुन्दर का फेला किनारा है वो, शायद मुझ जैसा ही आवारा है वो| वो सही बेवफा ज़माने की नज़र में, हर हाल में मुझे गवारा है वो| उसे नहीं आरजू किसी से कोई, तन्हा अपना खुद सहारा है वो| Filed under: कविताएँ, हिन्दी कविता, ग़ज़ल, Ghazals, Hindi... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[01 Apr 2010 23:49 PM]

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