चाणक्य नीति-विद्वान एकाग्रता से अपना काम स्वयं करते हैं (kam aur dhyan-chankya neeti)
इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरःदेशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकायणि साधयेत्।।हिन्दी में भावार्थ-ज्ञानी मनुष्य को बगुले की तरह एकाग्रता के साथ अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण करते हुए अपनी शक्ति के अनुसार ही अपना काम करना चाहिये। प्रभूतं कार्यमल्पं वा...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
14
0
0
0
1
[02 Apr 2010 00:08 AM]



Shuffle







