अप्पम खाकर जैसे जन्म जन्मान्तर की भूख मिट गयी हो.. .(केरल यात्रा संस्मरण -५ ).

क्वचिदन्यतोअपि..........! थेनामेला का घोषित पारिस्थितिकी पर्यटन मुझे खास आकर्षित नहीं कर सका बजाय मिस केरल के ...इसलिए मैं तो शाम को वापस हो लिया .मेरा दल वहीं मछलियों के शीशाघर मतलब अक्वेरियम के निर्माण  की प्रक्रिया को सीखने  में लगा रहा .शाम को डॉ. शोभना ने मुझे फिर... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[01 Apr 2010 22:13 PM]

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