कल चौदवीं की रात थी..

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू सारा दिन मसरूफ रहा मैंअब सोच रहा क्या होना है.इस पूनम के चाँद से मुझकोदो बातें करके सोना है.जिनसे छन जाती है ये चांदनीकुछ उन पलकों को भिगोना है.असमान जंहा चाँद सजा हैलगता दिल का कोई कोना है.सुलझा कर मन के धागे कोयादों के मोती पिरोना है.सदियाँ बीतीं इस... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan

hindi poetry

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[01 Apr 2010 21:23 PM]

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