जल, कविता और गोरैया

तुम किसकी माँ हो मेरी मातृभूमि जल, कविता और गोरैया के लिए, विनोद कुमार शुक्ल की यह कविता पढ़िए. वृक्ष की सूखी वृक्ष की सूखी टहनियों के समानांतर मैंने अपनी दो सुन्न बाहें फैलाईं और फुनगी पर एकटक दृष्टि यह चाहता हूँ कि जब पानी आये तो पहले आँखें भिंगों दे फिर कोई चिड़िया मेरी बाँहों की... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतोष पार्थेश्वर
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Mar 2010 10:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix