लाल चिरैया
लाल चिरैया 80 के बाद बिहार से आने वाले एक प्रमुख हिंदी कवि सुरेन्द्र स्निग्ध की यह बेहद कोमल कविता आपको बचपन के दिनों में ले जाएँगी. लिए चोंच में
घास किरन की
पूरब में हर सुबह-सुबह क्यों
लाल चिरैया आती है ? बैठी मेरे घर की छत पर
देहरी पर
फिर धीरे-धीरे...
[पूरी पोस्ट]
आशुतोष पार्थेश्वर
6
0
0
0
0
[22 Mar 2010 11:17 AM]



Shuffle








