मातृभूमि
मातृभूमि अरुण कमल की यह कविता उनके संकलन 'पुतली में संसार' में संकलित है. कवि और कविता के विषय में कुछ कहने से बेहतर है सीधे कविता पढ़ी जाये.... आज इस शाम जब मैं भींजता खड़ा हूँ आसमान और धरती के बीच
तब अचानक मुझे लगता है यही तो तुम हो मेरी माँ मेरी...
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आशुतोष पार्थेश्वर
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[26 Mar 2010 09:21 AM]



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