नदियाँ रोती हैं
नदियाँ रोती हैं
केदारनाथ सिंह के संकलन 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ' में 'नदियाँ' शीर्षक से एक कविता संकलित है. मार्च महीने के इस तीसरे शनिवार को 'अर्थ आवर' मनाते हुए यह कविता कुछ बेहद ही मार्मिक, चिंतनीय और जरूरी सवाल खड़ा करती है. धरती की तबियत ठीक नहीं...
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आशुतोष पार्थेश्वर
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[29 Mar 2010 08:56 AM]



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