कविता प्यार की - भाग दो

सरल कुमार इस कड़ी में ये मेरी दूसरी कविता हैं । असल में पहले सोचा कि इन्हें भागो में ब्लॉग में ना डालू पर समरूप होने के कारन कविता कि मौलिकता नष्ट नहीं होती और पढने वाले के विचारो में तादात्मय स्थापित रहता हैं । अब क्योंकि मन में भावुकता ज्यादा हैं तो सोचा प्यार के... [पूरी पोस्ट]
writer Virender Rawal
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[01 Apr 2010 19:30 PM]

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