विद्रोहों के केंद्र में कुछ रातें और कुछ दिनः जन मिर्डल व गौतम नवलखा

हाशिया बस्तर और माओवादी प्रभाव वाले इलाकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन के बारे में एक और रिपोर्ट आई है. स्वीडेन के लेखक जन मिर्डल और मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा ईपीडब्ल्यू के सलाहकार संपादक गौतम नवलखा हाल ही में उन इलाकों से लौटे हैं. उन्होंने... [पूरी पोस्ट]
writer Reyaz-ul-haque

शांति का मतलब है युद्ध

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[01 Apr 2010 17:46 PM]

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