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GIDHH अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार पर काका हाथरसी के दो व्यंग्य 1 बिना टिकिट के ट्रेन में चले पुत्र बलवीर जहाँ ‘मूड’ आया वहीं, खींच लई ज़ंजीर खींच लई ज़ंजीर, बने गुंडों के नक्कू पकड़ें टीटी गार्ड, उन्हें दिखलाते चक्कूगुंडागर्दी, भ्रष्टाचार बढ़ा दिन-दूनाप्रजातंत्र की... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
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[01 Apr 2010 15:11 PM]

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