चिड़ीमारों के देश में

मयखाना बड़े सवेरे निकलता हूँ और देर से घर पहुंचता हूँ सो गौरय्या को लेकर जो हाय-तौबा , उट्ठा-पटक मची हुई थी उस पर यकीं न होते हुए भी चुप था । आज मौक़ा मिल गया और सवेरे सात बजे ये तस्वीरें मैंने अपने आँगन में खुद खेंची हैं । ध्यान से देखें गौरय्या ही है न... [पूरी पोस्ट]
writer मुनीश ( munish )

इन माय विसिनिटी

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[01 Apr 2010 13:27 PM]

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