दौलत के खिलाड़ी-हिन्दी शायरी (daulat ke khiladi-hindi shayri)
दौलत के खिलाड़ी, दूसरों के जज़्बातों समझते नहीं,जहां मौका मिलता है, गेंद समझकर खेलते हैं वहीं।उनके मोहब्बत का पैगाम, होते हैं हमेशा एक धोखा,फायदे के लिये नफरत उगलते उनको देर लगती नहीं।कुछ पेट कम भर लेना, चीथड़े भी ओढ़ना अच्छा है,अपने जज़्बातों का जनाज़ा...
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दीपक भारतदीप
समाज
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[01 Apr 2010 13:34 PM]



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