गरीबों की कार का गरीबों जैसा हश्र...

अर्ज़ है... अरे कहां हैं...आप..? आपके सपनों की कार अब आपसे विदा ले रही है... और आप खामोश हैं... पहले आपका स्कूटर आपसे विदा हुआ.. और अब आपकी कार... अरे वही कार जिसके लिए आपने अपनी जेब काटकर कुछ रुपये गुल्लक में जमा किया थे... वही कार जिसके लिए आपने अपना पुराना स्कूटर... [पूरी पोस्ट]
writer अबयज़ ख़ान
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[01 Apr 2010 10:01 AM]

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