गम हमारे खुशी अपनी
क्यों लिखते हैं बेखुदी अपनी,
हैं गम हमारे खुशी अपनी|
आईने से नाराज़ हैं हम,
है खुदसे बेरुखी अपनी|
कोई पूछे मंजिल तो क्या कहें,
आवारा कर गयी बेसुधी अपनी|
कौन हैं हालात का जवाबदार,
हैं हम और है बेबसी अपनी|
मिलो सबसे मुस्कुरा कर...
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वीर
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[01 Apr 2010 08:45 AM]



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