शब्दों से भारी होते भाव

abhivyakti भाव कभी कभी शब्दों से ज्यादा भारी हो जाते है ...बयाँ ही नही हो पाते. शुन्य से शुरू होकर सोच शिखर तक पहुँच जाती है ....लेकिन सच कि परछाई वापस जमीं पर ले आती है...उन बातों को कैसे बयाँ करू जिनमे बंधन है ...बाधा है और ऐसी सरहदे है जो सिर्फ सपनो में ही पार... [पूरी पोस्ट]
writer himani
views
16
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[01 Apr 2010 08:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix