"हम तो चलते हैं लो ख़ुदा हाफ़िज़..."

विनय पत्रिका जीवन चलता रहता है। यही शाश्वत सच है। निर्मल बने रहने के लिए चलना पड़ेगा। बहता पानी निर्मला...। मुझे इतिहास की किताबें बहुत अच्छी लगती हैं। खासतौर पर उनके वे पात्र, जो देश व समाज की बनायी सीमाओं की बाधा को लांघकर लंबे सफर पर चलते रहे। अनजाने देश पहुंचे।... [पूरी पोस्ट]
writer विनय मिश्र
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[01 Apr 2010 08:48 AM]

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