रुखा सा लम्हा
रुखा सा लम्हा ले कर उसे,
हम नम बना लिया करते हैं|
तेरे बिना वक्त की सदियाँ,
हम यूँ गुज़ार लिया करते हैं|
याद जब खलिश सी लगती है,
नाम तेरा पुकार लिया करते हैं|
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वीर
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[01 Apr 2010 08:33 AM]



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