Kuchh kahi kuchh unkahi
मैं -एक दिन राख हो जाऊँगा श्मशान में -या, गाड दिया जाऊँगा कब्रिस्तान में -या, किसी ऊंची मीनार पे रख दिया जाऊँगा,ताकि मरने के बाद भी मैं काम आ सकूँ,उन पक्षियों के , जो मुझे पचा सकें।पर, -फिर भी, मैं जीवित रहूँगा -एक एहसास बन, उन दिलों में -जिन्हें मैंने...
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Nihar Khan
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[01 Apr 2010 07:01 AM]



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