रावण कुम्भकर्ण संवाद - युद्धकाण्ड (12)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण अग्निपुत्र नील के हाथों प्रहस्त के वध का समाचार सुनते ही रावण क्रोध से तमतमा उठा; किन्तु थोड़ी ही देर में उसका चित्त उसके लिये शोक से व्याकुल हो गया। उसके मन में भय उत्पन्न होने लगा। वह मन्त्रियों से बोला, "शत्रुओं को नगण्य समझकर मैं उनकी अवहेलना करता रहा... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[01 Apr 2010 06:58 AM]

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