मां - चन्द क्षणिकाएं

मेरी आवाज़ १.मां मैं जब भी मिलती हूं तुमसेपहले से कमजोर ही दिखती हूं तुम्हेंयह तुम्हारी नज़र का धोखा हैया नज़र कमजोर है२.मां तुम बातों ही बातों मेंउगलवा लेना चाहती होमेरे सीने में दफ़न सच्चाई कोकितनी भोली औरमासूम हो तुम३.दूर से आवाज़ सुनजान लेती हो सबकुछतुम्हारा... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव

कविता

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[01 Apr 2010 06:32 AM]

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