नाराज़ तुमसे

वीर की कलम से कह दूं ये राज़ तुमसे, के मैं हूँ नाराज़ तुमसे| झूमते हो मेरे लफ़्ज़ों पर, छीन लूं ये साज़ तुमसे| के मैं हूँ नाराज़ तुमसे… ये कुर्बत है और फासला भी, जोड़ते हैं मुझे अलफ़ाज़ तुमसे| के मैं हूँ नाराज़ तुमसे… बेखुदी में फ़ना होगा... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[01 Apr 2010 05:04 AM]

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