नया घर बनाएँ...

हिंदी हैं हम.. आओ थामो मेरे हाथों को,हम दूर तलक जाएँ,बंद कर ले पलकें,आँसू और ख्वाब दोनों छुपाएँ,हम दुनिया नयी सजाएं...रात और दिन दोनों है,जिंदगी के झोले में मगर,दिन से रौशनी ,रात से शबनम चुराएं,अलग सा शमा लगाएं....पहाड़ों घाटियों से जो गुजरें,उनकी ऊँचाइयों में गहरे,उन... [पूरी पोस्ट]
writer Astha Deo
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[01 Apr 2010 02:31 AM]

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