खिलौने अकेले में रोते हैं
गुजरा वक़्त कब लौटा है आंसू बह जाने के बाद मोहब्बत बढती जाती है मोहाबत खो जाने के बाद दीवानों के घर नहीं बसते साकी औ' मयखाने के बाद खिलौने अकेले में रोते हैं बच्चों को हंसाने के बाद पास कोई नज़र नहीं आता आँखें बूढी हो जाने के बाद यादों की उमर बढ़ती है बचपन...
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सुलभ § सतरंगी
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[31 Mar 2010 23:45 PM]



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