सारे गुलाब:ग़ज़ल

naturica उन लम्हों में तू कहाँ था,सच बता ऐ ग़मे दहर। मैं नयन से चुन रहा था , नयन के सारे गुलाब॥ ग़ज़ल पेशे खिदमत है .... तवज्जो चाहूँगा मुआमला ज़रा नाज़ुक है..... हसरतों में खिल रहे थे , मिलन के सारे गुलाब।और तुमको ढूंढ़ते थे , चमन के सरे गुलाब॥मेरे जवान होने का ,... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Tiruwa

ग़ज़ल

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[31 Mar 2010 23:44 PM]

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