आदमजात हुए क्यों बौने ?
चांदी-सी रातें, दिल सोने,फिर भी अपने-अपने रोने।घर में रहे विदेशी होकर,सुख-दुःख की खा-खाकर ठोकर।हो न सके हम नमक ठीक से,निगल रहे हैं ग्रास अलोने।झिलमिल कोई सुबह न कौंधी,सांझ पड़े गहराई रतौंधी।शादी हुई उधारी वाली,हो न सके फिर अपने गौने।अपनी रातें रहीं...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[31 Mar 2010 23:36 PM]



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