कौटिल्य का अर्थशास्त्र-विष के प्रतिदिन दर्शन से मन कलुषित होता है (hindi adhyamik gyan sandesh-vish darshan)
चकोरस्य विरज्येत नयने विषदर्शनात्।सुव्यक्तं माघति क्रोंचो प्रियते कोकिलः किल।हिन्दी में भावार्थ-विष को देखने मात्र से चकोर पक्षी की आंख लाल हो जाती है और कोकिल तो मृत्यु के गाल में ही समाज जाता है।नित्यं जीवस्य च ग्लानिर्जायते विषदर्शनात्।एषामन्यतमेनापि...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
11
0
0
0
0
[31 Mar 2010 23:18 PM]



Shuffle







