आपके साथ
यूँ तो ज़िन्दगी के अपने कुछ मायने थे,कहने को दोस्त थे, चाहतें भी थी...सपने थे बहुत कुछ करने के,फिर भी इंतज़ार था उनका....जब वो मेरे साथ नहीं थे...मैं तो गूम थी अपनी मस्रुफियतों में ,एक जिद थी ज़िन्दगी सवारने की,सपने दिल में कई थे यूँ तो,समझ कहाँ थी...
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Astha Deo
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[31 Mar 2010 23:21 PM]



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