चार पंक्तियाँ
टिप्पणियां गवाह हैं कुछ पुराने मित्रों का पुनरागमन हुआ है कुछ नए मित्र भी जुड़े हैं. सभी को प्रणाम निवेदित करते हुए चार पंक्तियाँ सौंपता हूँ किनेताऒं को दूध पिलाना ठीक नहींनाग पंचमी रोज मनाना ठीक नहींकिसी ने खादी किसी ने भगवा धार लियायों ही जनता को बहकाना...
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योगेन्द्र मौदगिल
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[31 Mar 2010 23:05 PM]



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