होनहार के खेल -1

Shri Tan Singh, Badmer कभी इस मार्ग पर घोड़े दौड़ते थे , कभी ऊंट दौड़ते थे , पर आज मोटरे दौड़ रही है | कभी इस मार्ग पर फौजे आती थी , कभी नगारे बजते थे , और आज सिर्फ यात्री आ रहे है और यात्री जा रहे है | कभी इस मार्ग पर जिन्दगी के कारवां गुजरते थे , कभी मौत के हरकारे दौड़ते थे पर... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय

स्व.श्री तन सिंह जी कलम से

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[31 Mar 2010 21:53 PM]

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