मैं तुम्हीं से आज अपने गान लूँगी !
मैं तुम्हीं से आज अपने गान लूँगी !मूक है वंशी तुम्हारी तो हुआ क्या ,मैं उसीसे आज स्वर, लय, तान लूँगी !मैं तुम्हीं से आज अपने गान लूँगी ! एक दिन जब प्यार सिर धुन रो रहा था,स्वार्थ का साम्राज्य अविचल हो रहा था,पापियों के भार से थी धरिणी कम्पित,विकल कोलाहल...
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Sadhana Vaid
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[31 Mar 2010 21:38 PM]



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