सैलाब मेरी आँखों में..........
सैलाब मेरी आँखों में........_____________________________आ गया कैसा ये सैलाब मेरी आँखों मेंसारे मंज़र हुए ग़रक़ाब मेरी आँखों मेंक्यों नहीं अब कोई उम्मीद की शमा’ रौशनक्यों मचलते नही अब ख़्वाब मेरी आँखों मेंमैं ने गर दे भी दिए सारे सवालों के जवाबफिर...
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इस्मत ज़ैदी
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[31 Mar 2010 14:43 PM]



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