नव गीत: मीत तुम्हारी राह हेरता... --संजीव 'सलिल'

संजीव  सलिल  की  रचनाएँ गीतमीत तुम्हारी राह हेरता...संजीव 'सलिल'*मीत तुम्हारी राह हेरता...*सुधियों के उपवन में तुमनेवासंती शत सुमन खिलाये.विकल अकेले प्राण देखकर-भ्रमर बने तुम, गीत सुनाये.चाह जगा कर आह हुए गुममूँदे नयन दरश करते हम-आँख खुली तो तुम्हें न पाकरमन बौराये, तन... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

samyik hindi kavita

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[31 Mar 2010 14:49 PM]

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