आज सन्डे !
मेरे एक मित्र देबाशीष बेनर्जी जो कि बेलूर मठ के हैं और बहुत अच्छे चित्रकार भी हैं, पेशे से पुलिस के लिए काम करते हैं, उनकी एक बंगाली में लिखी कविता का अनुवाद उनकी अनुमति से पेश कर रहा हूँ !आज सन्डे !हर रोज रफ़्तार से चलती है ज़िन्दगी,
आज छुट्टी...
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nilesh mathur
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[31 Mar 2010 15:14 PM]



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