चलो मान लिया कि आज एक अप्रैल है . . . लेकिन क्या इसका मतलब यह मानूँ कि इस बार भी कोई 'समझदार' इस पोस्ट को नहीं पढ़ेगा !!!
...मेरे क्षमाशील पाठक,मेरा मानना है कि इस मुद्दे पर अभी काफी चर्चा की जरूरत है अपने हिन्दी ब्लॉगजगत में...इसलिये दोबारा से एक बार लगा रहा हूँ अपनी यह पोस्ट :-(अग्रिम क्षमायाचना के साथ!)...मेरे नारी सशक्तिकरण चिंतक मित्रों,कभी-कभी मेरी तरह आपको भी नहीं...
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प्रवीण शाह
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[31 Mar 2010 14:30 PM]



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