मेरे शब्दों का पिटारा-शोभना
बहुत दिनों से मेरे शब्दों का पिटारा बंद थाबहुत से कामों को निपटाने मेंलगा मेरा मन थाबहुत से ख्याल दिल में आते थे पर मेरे हाथ कलम नहीं पकड़ पाते थे अक्सर मेरा दिमागमेरे दिल सेजीत जाया करता हैऔर फिर मेरेशब्दों का...
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Shobhna Choudhary
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[31 Mar 2010 13:22 PM]



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