अरुंधति का रूमान
अरुंधति अपने दांतेवाड़ा यात्रा वृत्तान्त का अंत एक ऐसे शाएर की एक मशहूर नज़्म के एक टुकड़े से करती है, जो अपनी रुमानी क्रांतिकारिता के लिए प्रसिद्ध है- फ़ैज़।वहाँ पाया गया अंश यह है :हम अहले-सफा मर्दूदे-हरममसनद पे बिठाए जाएंगेसब ताज उछाले जाएंगेसब तख्त गिराए...
[पूरी पोस्ट]
अभय तिवारी
38
4
0
4
14
[31 Mar 2010 11:46 AM]



Shuffle








