"एक घर"

aapkayogeshsharma वक्त की रेत फिर इकठ्ठा करके, आँख से थोड़ी सी नमी लेके,पलों के कंकड़ों को चुन चुन के,   याद के गारे में मिलाया है, लफ्ज़ की ईंटों को फिर लगाया है, मैंने शायरी का घर बनाया है, स्याह रातों को, रंगीन सुबहों को,दिल की गहराईओं में कैद... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma

"एक घर"

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
6
[31 Mar 2010 09:22 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix