सपनो से मिली सजा

abhivyakti सीले हुए से कुछ शब्द सुखी हुई सी कुछ उम्मीदेंखालीपन से भरे इस दिल में         अब और बचा ही क्या है सोचे बिन ही समझ लेने की भूल और जाने बिन ही देख लेने का अपराध सपनो के इस गुनाह की बाकी सजा भी क्या है जोप जुर्म किया... [पूरी पोस्ट]
writer himani
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[31 Mar 2010 09:20 AM]

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