मैं भी पढ़ना सीख रही हूँ : आकांक्षा यादव का नया बालगीत
मैं भी पढ़ना सीख रही हूँमैं भी पढ़ना सीख रही हूँ,ताकि पढ़ सकूँ मैं अखबार।सुबह-सवेरे मेरे द्वार,हॉकर लाता है अखबार।कभी नहीं वह नागा करता,शीत पड़े या पड़े फुहार।मैं भी ... ... .दादा जी का हो जाता है,आते ही पहले अखबार।चश्मा ऊपर-नीचे करके,पढ़ते वे दुनिया का...
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रावेंद्रकुमार रवि
बालगीत
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[31 Mar 2010 07:45 AM]



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