न जाने कौन सी बात
उड़न तश्तरी की ताजा पोस्ट से प्रेरणा लेकर
न जाने कौन सी बात पहचान बनेवो मुलाकात कल्पना की उड़ान बने पल्लवित होती बेलें , नाजुक ही सहीबढ़-बढ़ के छूने को आसमान बने तपन गर्मी की , बौरों से लदेपेड़ों के फलों की मिठास का गुमान बने चाँद सूरज हैं नहीं दूर हमसेधरती...
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शारदा अरोरा
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[31 Mar 2010 06:33 AM]



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