बारिश

बिखरे  मोती बिखरे वजूद के अक्स को समेट लरजती हुई साँसों से घायल से जज़्बात लिए एक छटपटाती सी नज़्म तैर गयी है मेरी सूनी आँखों में , इस बार बारिश नहीं हुई          ... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[31 Mar 2010 05:34 AM]

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