सत्तू

मेरी कहानियां ......मैं और बिरजू , ज़ेबा जी के बंगले के पास ही पहुंचे थे , तभी ज़ेबा जी अपनी कार से बाहर निकली शूटिंग पे जानेके लिए ....उनकी कार हमारे सामने से गुजरी .....और हम से कुछ दूरी पे जा कर रुक गयी । मैं घबरा गया ,बिरजू भी डर गया ,हम दोनों तेजी से आगे बढ़ गये... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार

सत्तू

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[31 Mar 2010 04:00 AM]

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