कोई बोली ना रह जाए 'अनबोली'
क्या हुआ अगर एक भाषा खत्म हो गईवह अपने झूठ और सच के साथ दफन हो गई,शब्द नहीं रहे, दुनिया बढ़ती रहीबोआ की दुनिया की खातिर, कहीं कोई नहीं रोया।’बाबुई और अर्जून जाना की यह कविता उस 85 वर्षिय अंदमानी महिला बोआ को समर्पित है जो अंदमान में बोली जाने वाली दस...
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आशीष कुमार 'अंशु'
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[31 Mar 2010 03:59 AM]



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