हिसाब

वीर की कलम से आओ हिसाब साफ़ कर लें, खुदको खुदसे पास कर लें| सच बोलना महंगा था ना सनम, एक दुसरे के झूठ माफ कर लें| नज़र आयें वैसे जैसे हैं हम दोनों, ईमान अपना मिलकर पाक कर लें| मैं बसा लूं आपको सीने में, आप गिराके ज़ुल्फ़ को रात कर लें| क्यों रहें हम... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

poemhindi poetryshayarighazals

views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[31 Mar 2010 02:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix