हिसाब
आओ हिसाब साफ़ कर लें,
खुदको खुदसे पास कर लें|
सच बोलना महंगा था ना सनम,
एक दुसरे के झूठ माफ कर लें|
नज़र आयें वैसे जैसे हैं हम दोनों,
ईमान अपना मिलकर पाक कर लें|
मैं बसा लूं आपको सीने में,
आप गिराके ज़ुल्फ़ को रात कर लें|
क्यों रहें हम...
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वीर
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[31 Mar 2010 02:57 AM]



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