मतलब क्‍या है फिर देखने का, सुनने का?

azdak कुछ बिम्‍ब, कोई स्‍वर अंदर अवचेतन में कहीं गड़ा रह जाता है, क्‍यों गड़ा रह जाता है? जैसे यही फ़ि‍ल्‍म के अंत का यह बैकग्राउंड स्‍कोर की सीधी सरल पुकार, मगर कैसी गहरी मार.. कहां से सरलता में चला आता और फिर किस अमूर्तन में छोड़े जाता, क्‍यों?... [पूरी पोस्ट]
writer Pramod Singh

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[31 Mar 2010 03:08 AM]

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